पंचांग व कंप्यूटर के बिना 2 मिनट में लग्न बताना

ज्योतिष में किसी कुंडली का सबसे अहम् स्थान है तो वह है लग्न l लग्न के जानने मात्र से हम उस व्यक्ति के बारें में कई बातें जान लेते है l वैसे तो लग्न की ज्योतिषीय परिभाषा है की किसी दिनांक विशेष, समय विशेष और स्थान विशेष पर पूर्वी क्षितिज पर में उदित राशी को लग्न कहते है l

बौद्धिक आतंकवाद : शोषित का विद्रोह – ईंटोलरंस और हिंसा

आज का शिक्षित वर्ग एक उच्च आदर्श के ढोंग खुद के फायदे के लिए जी रहा है । समाज में समय समय पर उनके ये सन्देश दर्शाते है की उनकी एक सभ्य जिंदगी है, जिसमे बड़े अपराध उनकी उच्च जिंदगी का हिस्सा है।

सोलह संस्कार

sixteen sacred rites of hinduism

सनातन अथवा हिन्दू धर्म की संस्कृति संस्कारों पर ही आधारित है। हमारे ऋषि-मुनियों ने मानव जीवन को पवित्र एवं मर्यादित बनाने के लिये संस्कारों का अविष्कार किया।

कर्म और भाग्य ज्योतिष की दृष्टि में

एक सर्वमान्य नियम यह है कि ‘‘नाभुक्तं क्षीयते कर्म कोटिकल्पशतैरपि।’’ अर्थात् कोई भी कर्म करोड़ो कल्प बीतने पर भी बिना भोगे नाश को प्राप्त नहीं होता।

चमत्कारी रमल ज्योतिष

चमत्कारी रमल ज्योतिष - रमल आचार्य अनुपम जौली पाँसों द्वारा प्राप्त ईश्वरीय संकेतो को समझकर उत्तर देने की विद्या, कला या विज्ञान का नाम है “रमल ज्योतिष” | भारत में इस विद्या का उद्गम भगवान शिव से हुआ और यह विद्या पूरे विश्व में फ़ैल गई | इस विद्या के संकेत भारत के अलावा अरब, [...]

ज्योतिष शिक्षण माला भाग – 004

नक्षत्र विवेचन भारतीय पंचांग तथा ज्योतिष में नक्षत्रों (अंग्रेजी में Constellations) को अत्यधिक महत्व दिया गया है। परंपरानुसार ‘न क्षरतीति नक्षत्राणि’ अर्थात् जिनका क्षरण नहीं होता, वे ‘नक्षत्र’ कहलाते हैं। इन्हें अपने स्थान पर स्थिर माना गया है जबकि सूर्य सहित अन्य सभी ग्रह-उपग्रह नक्षत्रों में अपने-अपने पथ पर विचरण करते हैं। प्राचीन ज्योतिष में […]

नवग्रहों के प्रसन्नार्थ स्तुति व दान

नवग्रहों के प्रसन्नार्थ स्तुति व दान दानेन प्राप्यते स्वर्गः श्रीर्दानेनैव लभ्यते। दानेन शत्रून् जयति व्याधिर्दानेन नश्यति।। अर्थात् दान के द्वारा मनुष्य इस लोक में समस्त प्रकार के सुख भोगकर मृत्यु पश्चात् परलोक में भी शांति तथा सुख की प्राप्ति करता है। दान द्वारा ही शत्रुओं को नाश होता है और दान द्वारा ही समस्त व्याधि-बीमारियां […]

नारद संहिता में ज्योतिष विज्ञान के सूत्र, भाग-1

नारद संहिता में ज्योतिष विज्ञान के सूत्र, भाग-1 मेष आदि राशियाँ कालपुरुष के क्रमश : मस्तक , मुख , बाहु , ह्रदय , उदर , कटि , वस्ति ( पेंडू ), लिङ्ग , ऊरु , जानु , जङ्घा और दोनों चरण हैं। राशी स्वामी : मङ्गल , शुक्र , बुध , चन्द्रमा , सूर्य , […]

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