ज्योतिष सीरीज -003

जन्मपत्रिका में विभिन्न राजयोग विचार राजयोग किसी भी कुंडली में लगन से केन्द्र विभाव ष्णु स्थान कहलाते है एवं लग्र से त्रिकोण स्थान लक्ष्मी स्थान कहलाते है । जब भी इन विष्णु एवं लक्ष्मी स्थानों का संबंध अर्थात परस्पर इन भावों के स्वामी आपस में संबंध बनाते है तो राजयोग का निर्माण होता है। विष्णु […]
ज्योतिष सीरीज -002

मुहूर्त के सामान्य प्रचलित नियम आचार्य अनुपम जौली वैदिक ज्योतिष में वार तथा तिथि के संयोग से बनने वाले मुहूर्तों को रोजमर्रा के काम-काज करने के लिए उपयुक्त माना जाता है। इन्हें कोई भी व्यक्ति स्वयं ही देख सकता है और इसके लिए किसी ज्योतिषी के पास जाने की भी जरूरत नहीं होती है। […]
ज्योतिष सीरीज -001

वेदांग ज्योतिष में मुहूर्त – आचार्य अनुपम जौली गणेशम् एकदन्तं च हेरम्बं विध्ननायकम्, लम्बोदर्ं शूर्पकर्णम् गजवक्त्रम् गुहाग्रजम्। नामाष्टार्थ च पुत्रस्य श्रृणु मातर्हरप्रिये, स्रोत्राणां सारभूतं च सर्वविध्न हरम् परम्।। वेदांग ज्योतिष में मुहूर्त देखने के लिए एक विशेष शाखा का निर्माण किया गया है। ज्योतिष की इस शाखा को मुहूर्त ज्योतिष कहा जाता है। मुहूर्त […]