ज्योतिष शिक्षण माला भाग – 004

नक्षत्र विवेचन भारतीय पंचांग तथा ज्योतिष में नक्षत्रों (अंग्रेजी में Constellations) को अत्यधिक महत्व दिया गया है। परंपरानुसार ‘न क्षरतीति नक्षत्राणि’ अर्थात् जिनका क्षरण नहीं होता, वे ‘नक्षत्र’ कहलाते हैं। इन्हें अपने स्थान पर स्थिर माना गया है जबकि सूर्य सहित अन्य सभी ग्रह-उपग्रह नक्षत्रों में अपने-अपने पथ पर विचरण करते हैं। प्राचीन ज्योतिष में […]

नारद संहिता में ज्योतिष विज्ञान के सूत्र, भाग-1

नारद संहिता में ज्योतिष विज्ञान के सूत्र, भाग-1 मेष आदि राशियाँ कालपुरुष के क्रमश : मस्तक , मुख , बाहु , ह्रदय , उदर , कटि , वस्ति ( पेंडू ), लिङ्ग , ऊरु , जानु , जङ्घा और दोनों चरण हैं। राशी स्वामी : मङ्गल , शुक्र , बुध , चन्द्रमा , सूर्य , […]

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