Astrology Learning Web Series – Chapter #002

dhana yogas in vedic astrology

Chapter #002 Content Dhana Yogas : Combinations for poverty, Education, Tastes and speech Dhana yogas If the there’s a parivartana between either the 2nd and 5th lords or the 2nd and 11th lords, the native earns a lot. This is also true for the placement of the 5th and 9th lords in their own houses If […]

Astrology Learning Web Series – Chapter #001

Learn astrology online free

Chapter #001 Content Lagna :  Aries, Taurus, Gemini, Cancer, Leo, Virgo, Libra, Scorpio, Sagittarius, Capricorn, Aquarius, Pisces Aries: A Sun-Moon combination confers rajayoga Venus is a maraka Jupiter becomes a maraka if he occupies Capricorn A Jupiter-Saturn association doesn’t confer a rajayoga An Aries native will have fear of diseases (especially smallpox), weapons and injuries […]

Ramal Astrology is Not of Arabic Origin, It is Indian!

Jyotish or Astrology means the Vision of the Divine. Jyotish is among the six scriptures that elucidate Vedas. There are three branches of astrology. (1) Falit (findings) (2) Ganit (mathematics) (3) Siddhant (theory). Due to these three branches, astrology is called three dimensional. Using all the three dimensions together, knowledge of past, future, present, form, […]

ज्योतिष शिक्षण माला भाग – 005

मुहूर्त के मूल पांच अंग “पंचांग” व “कैलेंडर” ज्योतिष के किसी भी विषय को समझने के लिए जरुरी है कि सबसे पहले पंचांग को समझा जाये। पंचांग में तिथि, वार, नक्षत्र, योग, करण ये पांच होते हैं। इन पांच अंगों के मिलने से पंचांग कहलाता है। ज्योतिष ज्योतिष का अर्थ :  ज्योति + ईश आकाश […]

राशिफल 2018

वर्ष 2017 समाप्त हो रहा है और वर्ष 2018 आरंभ होगा। ऐसे में सभी को ज्योतिष के आधार पर अपना-अपना भविष्य जानने की उत्सुकता है। गोचर तथा नामराशि के आधार पर आने वाला वर्ष 2018 का भाग्यफल तैयार है। गोचर पर आधारित होने एवं जन्मकालीन कुंडली में ग्रहों की दशा-अन्तर्दशा को देखते हुए संभव है कि यह कुछ लोगों के लिए खरा न उतरें। अतः इसे दिशा-निर्देश ही मानें।

ज्योतिष शिक्षण माला भाग – 004

नक्षत्र विवेचन भारतीय पंचांग तथा ज्योतिष में नक्षत्रों (अंग्रेजी में Constellations) को अत्यधिक महत्व दिया गया है। परंपरानुसार ‘न क्षरतीति नक्षत्राणि’ अर्थात् जिनका क्षरण नहीं होता, वे ‘नक्षत्र’ कहलाते हैं। इन्हें अपने स्थान पर स्थिर माना गया है जबकि सूर्य सहित अन्य सभी ग्रह-उपग्रह नक्षत्रों में अपने-अपने पथ पर विचरण करते हैं। प्राचीन ज्योतिष में […]

नवग्रहों के प्रसन्नार्थ स्तुति व दान

नवग्रहों के प्रसन्नार्थ स्तुति व दान दानेन प्राप्यते स्वर्गः श्रीर्दानेनैव लभ्यते। दानेन शत्रून् जयति व्याधिर्दानेन नश्यति।। अर्थात् दान के द्वारा मनुष्य इस लोक में समस्त प्रकार के सुख भोगकर मृत्यु पश्चात् परलोक में भी शांति तथा सुख की प्राप्ति करता है। दान द्वारा ही शत्रुओं को नाश होता है और दान द्वारा ही समस्त व्याधि-बीमारियां […]

नारद संहिता में ज्योतिष विज्ञान के सूत्र, भाग-1

नारद संहिता में ज्योतिष विज्ञान के सूत्र, भाग-1 मेष आदि राशियाँ कालपुरुष के क्रमश : मस्तक , मुख , बाहु , ह्रदय , उदर , कटि , वस्ति ( पेंडू ), लिङ्ग , ऊरु , जानु , जङ्घा और दोनों चरण हैं। राशी स्वामी : मङ्गल , शुक्र , बुध , चन्द्रमा , सूर्य , […]

हनुमद वडवानल स्तोत्र

रावण के भाई श्री विभीषण जो की भगवान राम व हनुमान जी के अनन्य भक्त थे, अपनी पूजा में वो निरंतर दोनों की पूजा किया करते थे। भक्त विभीषण ने कष्टों से मुक्ति व सुरक्षा हेतु उन्होंने हनुमद वडवानल स्तोत्र की रचना की। इस चमत्कारी वडवानल स्तोत्र पर भगवान श्रीराम व हनुमान जी का आशीर्वाद […]

ज्योतिष शिक्षण माला भाग 003

ज्योतिष शिक्षण माला भाग 3 भारतीय ज्योतिष के अनुसार राशियों के गुण धर्म   मेष राशि भौतिक लक्षण : मध्यम कद, पतला मांसल शरीर, लंबा चेरा और गर्दन, चौड़ा, मस्तक, सिर या कनपटी पर निशासन, सुदृढ़ दंतपक्ति, गोल आंखें, घुंघराले बाल। अन्य गुण : उत्तम स्वभाव और आकर्षण। सौभागशाली वर्ष : १६,२०,२८,३४,४१,४८,५१ कष्टप्रद वर्ष : […]