सोलह संस्कार

सनातन अथवा हिन्दू धर्म की संस्कृति संस्कारों पर ही आधारित है। हमारे ऋषि-मुनियों ने मानव जीवन को पवित्र एवं मर्यादित बनाने के लिये संस्कारों का अविष्कार किया।
कर्म और भाग्य ज्योतिष की दृष्टि में

एक सर्वमान्य नियम यह है कि ‘‘नाभुक्तं क्षीयते कर्म कोटिकल्पशतैरपि।’’ अर्थात् कोई भी कर्म करोड़ो कल्प बीतने पर भी बिना भोगे नाश को प्राप्त नहीं होता।
चमत्कारी रमल ज्योतिष
चमत्कारी रमल ज्योतिष - रमल आचार्य अनुपम जौली पाँसों द्वारा प्राप्त ईश्वरीय संकेतो को समझकर उत्तर देने की विद्या, कला या विज्ञान का नाम है “रमल ज्योतिष” | भारत में इस विद्या का उद्गम भगवान शिव से हुआ और यह विद्या पूरे विश्व में फ़ैल गई | इस विद्या के संकेत भारत के अलावा अरब, [...] नागा साधु – सम्पूर्ण जानकारी और इतिहास भाग 02

आदिगुरू शंकराचार्य को लगने लगा था सामाजिक उथल-पुथल के उस युग में केवल आध्यात्मिक शक्ति से ही इन चुनौतियों का मुकाबला करना काफी नहीं है।
नागा साधु – सम्पूर्ण जानकारी और इतिहास

नाथ सम्प्रदाय का आरम्भ आदिनाथ शिव से हुआ है और इसका वर्तमान रुप देने वाले योगाचार्य श्री गोरखनाथ जी, भगवान शिव के अवतार हुए है। इनके प्रादुर्भाव और विलय का कोई लेख अब तक प्राप्त नही हुआ
नाथ सम्प्रदाय

नाथ सम्प्रदाय का आरम्भ आदिनाथ शिव से हुआ है और इसका वर्तमान रुप देने वाले योगाचार्य श्री गोरखनाथ जी, भगवान शिव के अवतार हुए है। इनके प्रादुर्भाव और विलय का कोई लेख अब तक प्राप्त नही हुआ
राशिफल 2018

वर्ष 2017 समाप्त हो रहा है और वर्ष 2018 आरंभ होगा। ऐसे में सभी को ज्योतिष के आधार पर अपना-अपना भविष्य जानने की उत्सुकता है। गोचर तथा नामराशि के आधार पर आने वाला वर्ष 2018 का भाग्यफल तैयार है। गोचर पर आधारित होने एवं जन्मकालीन कुंडली में ग्रहों की दशा-अन्तर्दशा को देखते हुए संभव है कि यह कुछ लोगों के लिए खरा न उतरें। अतः इसे दिशा-निर्देश ही मानें।